Israel US Iran War: इजरायल-अमेरिका और ईरान युद्ध को आज शनिवार को एक महीना हो गया। आज ही के दिन 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर पहला बड़ा हमला किया था, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई वरिष्ठ लीडरों की मौत हो गई थी। अमेरिका का मकसद खामेनेई की हत्या के बाद ईरान में रिजीम चेंज करना था, मगर युद्ध के 1 माह बीत जाने के बाद भी ट्रंप के कुछ उद्देश्य अधूरे रह गए हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के उन पांच उद्देश्यों की सूची दी है जिन्हें ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने से पहले हासिल करना चाहते हैं।
संघर्ष थमने के आसार नहीं
अब संघर्ष शुरू हुए एक महीना हो गया है। इसके थमने के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं। फिर भी ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका जल्द ही इस अभियान को "समाप्त" करने की ओर बढ़ सकता है, भले ही उनके कुछ प्रमुख लक्ष्य अभी भी अस्पष्ट या अधूरे रह गए हों। ट्रंप ने पिछले सप्ताह इस बड़े हवाई अभियान के लिए पांच लक्ष्य बताए थे। ट्रंप प्रशासन कहता है कि उसके उद्देश्य स्पष्ट और अपरिवर्तनीय हैं, लेकिन युद्ध के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर, गठबंधनों की परीक्षा और युद्ध की योजना, उसके औचित्य तथा उसके बाद की स्थिति को लेकर अनसुलझे सवालों के कारण प्राथमिकताओं की सूची बढ़ी और बदली भी है। ज्यादातर रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के हमलों ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को काफी हद तक कमजोर कर दिया है और कई वरिष्ठ नेताओं को मार गिराया है, लेकिन इन रणनीतिक सफलताओं का मतलब यह नहीं है कि राष्ट्रपति के सभी सामरिक उद्देश्य पूरे हो गए हैं।
ईरान में ट्रंप के उद्देश्यों को हासिल करना मुश्किल
युद्ध के 1 माह बीत जाने के बाद अब ईरान में ट्रंप के कुछ उद्देश्यों को हासिल करना बहुत मुश्किल है। अगर अमेरिका अधूरे लक्ष्यों के साथ युद्ध से पीछे हट जाता है और ईरान की पैरामिलिट्री इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) सत्ता में बनी रहती है, तो ट्रंप को घरेलू राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है और दुनिया भर में यह सवाल उठ सकता है कि एक "चुनिंदा युद्ध" शुरू करने के उनके फैसले से क्या हासिल हुआ, जिसने पूरे मध्य पूर्व को उलट-पुलट कर दिया और वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला दिया। ट्रंप और व्हाइट हाउस ने जोर देकर कहा है कि अभियान अच्छी तरह चल रहा है और अपने लक्ष्यों को पूरा करने की राह पर है। ह्वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लीविट ने इस सप्ताह पत्रकारों से कहा, "हम ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के मुख्य उद्देश्यों को पूरा करने के बहुत करीब हैं और यह सैन्य मिशन बिना रुके जारी है।" उन्होंने कहा कि अभियान "समय से पहले चल रहा है और असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।"
ईरान में क्या हैं ट्रंप के प्रमुख उद्देश्य और उसकी मौजूदा हालत
ईरान की मिसाइल क्षमता को पूरी तरह से नष्ट करना
ट्रंप का प्रमुख उद्देश्य था कि "उनकी मिसाइलों को नष्ट कर दिया जाए और उनकी मिसाइल उद्योग को जमीन पर बराबर कर दिया जाए।" प्रशासन का दावा है कि इस क्षमता को काफी हद तक कमजोर कर दिया गया है।
लेकिन ईरान अभी भी मिसाइलें और ड्रोन दाग रहा है, जिसमें इजरायल पर कई बैराज शामिल हैं, जबकि ट्रंप दावा कर रहे थे कि ईरान के साथ बातचीत चल रही है। ट्रंप ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में कहा कि ईरान की लगभग 90% मिसाइलें और लॉन्चर नष्ट कर दिए गए हैं, और ड्रोन तथा मिसाइल-ड्रोन फैक्टरियां "बहुत नीचे" आ गई हैं।
ईरान के रक्षा औद्योगिक आधार को नष्ट करना
पिछले सप्ताह से पहले राष्ट्रपति और उनके प्रशासन ने कभी-कभी इसे अलग उद्देश्य बताया था, जिसमें "मिसाइल उद्योग को मिट्टी में मिलाना" शामिल था। अन्य समय में यह सूची से हट भी गया।
पेंटागन ने इसे आमतौर पर पहले उद्देश्य (मिसाइल क्षमता नष्ट करना) के साथ जोड़ दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि ईरान में उसके हमलों के निशाने पर हथियार उत्पादन और मिसाइल-ड्रोन निर्माण सुविधाएं शामिल थीं।
लेकिन ईरान के खाड़ी पड़ोसियों और इजरायल पर हमले अभी भी जारी हैं।
ईरान की नौसेना और वायुसेना को नष्ट करना
अमेरिका और इजरायल ने दावा किया कि उन्होंने ईरान के ऊपर आसमान में जल्दी ही हवाई श्रेष्ठता स्थापित कर ली, जहां वे लगभग बिना चुनौती के उड़ान भर रहे हैं। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका ने 150 से अधिक ईरानी जहाजों को क्षतिग्रस्त या नष्ट कर दिया है। मार्च की शुरुआत में एक अमेरिकी पनडुब्बी ने एक ईरानी युद्धपोत को टॉरपीडो मारकर डुबो दिया। उसके बाद दो अन्य ईरानी जहाज-आईआरआईएस बुशहर और आईआरआईएस लवान-श्रीलंका और भारत में रुके और दोनों देशों से मदद मांगी। अमेरिका की ओर से कोई संकेत नहीं है कि वे बाद में डुबोए गए या कब्जे में लिए गए। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड की अपनी नौसेना है जो छोटे जहाजों पर निर्भर है, जो झुंड में हमले करती है और माइन्स बिछाती है। ईरानी मिसाइलें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से शिपिंग को अभी भी बाधित कर रही हैं।
ईरान की न्यूक्लियर क्षमता नष्ट करना
अमेरिका और ट्रंप का उद्देश्य ईरान को न्यूक्लियर क्षमता हासिल करने के करीब भी न जाने देना था। इजरायल और अमेरिका ने कई बार ईरान के परमाणु ठिकानों पर जून 2025 से अब तक हमले किए हैं। मगर ट्रंप ने जून में उन्होंने कहा था कि अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम को "पूरी तरह नष्ट" कर दिया है, लेकिन उनके सहयोगियों ने वर्तमान अभियान को सही ठहराने के लिए चेतावनी दी कि ईरान बम बनाने से सिर्फ कुछ हफ्ते दूर था। ईरानी राज्य मीडिया ने कहा कि शुक्रवार को उसकी न्यूक्लियर सुविधाओं पर हमला हुआ। एक हेवी वॉटर प्लांट और एक येलोकेक उत्पादन संयंत्र को निशाना बनाया गया। इजरायल ने बाद में पुष्टि की कि हमले उसके थे। इजरायल ने पहले भी अन्य न्यूक्लियर संबंधित लक्ष्यों पर हमले किए थे, जिसमें एक शीर्ष ईरानी न्यूक्लियर वैज्ञानिक की हत्या भी शामिल है। युद्ध का सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या ट्रंप तेहरान के पास मौजूद लगभग 970 पाउंड संवर्धित यूरेनियम को जब्त या नष्ट करना चाहेंगे, जिसका उपयोग संभावित रूप से हथियार बनाने के लिए किया जा सकता है।
ट्रंप ने सोमवार को पहली बार कहा कि अमेरिका उस यूरेनियम को वापस लेगा, जो एक पहाड़ी सुविधा की गहराई अंदर दबा हुआ है। लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि यह तभी होगा जब अमेरिका ईरान के साथ कोई सौदा कर ले। ईरान की अनुमति के बिना इसे जब्त करना एक खतरनाक मिशन होगा। विशेषज्ञों का कहना है इसमें देश के अंदर बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती की जरूरत पड़ेगी।
मध्य पूर्वी सहयोगियों की उच्चतम स्तर पर सुरक्षा
ट्रंप ने हाल ही में एक सोशल मीडिया पोस्ट में अमेरिका के लिए पांचवां उद्देश्य जोड़ा: "हमारे मध्य पूर्वी सहयोगियों की उच्चतम स्तर पर सुरक्षा, जिसमें इजरायल, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत और अन्य शामिल हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा और निगरानी जरूरत पड़ने पर उन देशों द्वारा करनी होगी जो इसका उपयोग करते हैं, संयुक्त राज्य अमेरिका नहीं!" अमेरिका पहले से ही क्षेत्र में हजारों सैनिकों को ठिकानों और अन्य स्थानों पर रखे हुए है। यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने के लिए कितना आगे जाएगा। ट्रंप ने इस पर दो राय रखी है कि क्या अमेरिका को इसमें पुलिसिंग की भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर से खोलने या उसके बिजली संयंत्रों पर हमलों का सामना करने के लिए समयसीमा फिर बढ़ा दी है, अब 6 अप्रैल तक का समय दिया गया है।
ईरान में सत्ता परिवर्तन (Regime Change) की मंशा
ट्रंप का प्रमुख उद्देश्य ईरान में सत्ता परिवर्तन करना था। मगर यह दूर की कौड़ी लग रही है। अमेरिका की इस मंशा को ईरान ने तगड़ा झटका दिया है। ट्रंप युद्ध शुरू होने से ही शासन परिवर्तन की बात कर रहे हैं। उन्होंने ईरानी लोगों से कहा था कि "अपनी सरकार अपने हाथ में ले लो", जब इजरायल ने अमेरिका की मदद से हमले किए, जिनमें ईरान के सर्वोच्च नेता और उसके ऊपरी स्तर के कई नेताओं की मौत हो गई। हालांकि ट्रंप और उनके प्रशासन ने कभी स्पष्ट रूप से ईरान में शासन परिवर्तन को उद्देश्य नहीं बताया, भले ही उन्होंने साफ कर दिया हो कि वे दमनकारी धर्मतंत्र के 47 साल पुराने शासन को समाप्त करना चाहते हैं। ट्रंप ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में कहा कि ईरानी शासन "मुख्य रूप से तबाह" हो चुका है।
उन्होंने फॉक्स न्यूज चैनल के साक्षात्कार में कहा, "आप वाकई कह सकते हैं कि हमने शासन परिवर्तन कर दिया है क्योंकि वे मारे जा चुके हैं।"अब अमेरिका का दावा है कि वह उसी ईरानी सरकार के कुछ तत्वों से बातचीत कर रहा है, ताकि संघर्ष को जल्दी समाप्त किया जा सके और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को समुद्री यातायात के लिए फिर से खोला जा सके।